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उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, झारखण्ड सरकार का एक गैर योजना विभाग है। विभाग का मुख्य कार्य मादक द्रव्यों के विनियमन से संबंधित प्रशासन का संचालन करना एवं भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में से एक ‘‘मद्य निषेध’की दिशा में यथा सम्भव कारगर प्रयास करना है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रमुख कार्य उत्पाद वस्तुओं के विनियमन के क्रम में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न प्रकार के करों एवं शुल्कों के संग्रहण से राजस्व प्राप्ति कर राजकीय कोष को समृद्ध करना है। राजस्व वृद्धि के सतत प्रयास के फलस्वरूप राज्य के विकास एवं लोक हितकारी योजनाओं को बल प्राप्त होता है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के अन्तर्गत झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 एवं इसके अन्तर्गत बने विभिन्न नियमावली के तहत उत्पाद वस्तुओं के विनियमन हेतु विभिन्न प्रकार की अनुज्ञप्ति, पास एवं परमिट निर्गत किया जाता है। इन उत्पाद वस्तुओं के विधि सम्मत पर्यवेक्षण हेतु विभाग द्वारा मदिरा के बोतलों पर चिपकाये जानेवाले लेबलों के निबंधन/नवीकरण एवं अधिकतम खुदरा बिक्री मूल्य का निर्धारण का कार्य भी किया जाता है। मादक द्रव्यों के दुरूपयोग को रोकने एवं उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त मदिरा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभाग द्वारा निरीक्षण, पर्यवेक्षण, छापामारी एवं अन्य निरोधात्मक कार्य किया जाता है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का मुख्य लक्ष्य झारखण्ड उत्पाद अधिनियम एवं इसके अन्तर्गत गठित विभिन्न नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए राजकीय कोष हेतु उत्तरोत्तर राजस्व संग्रहण में वृद्धि करना है। सम्प्रति देशी शराब/मसालेदार देशी शराब एवं विदेशी शराब की थोक बिक्री अनन्य विशेषाधिकार झारखण्ड राज्य बिवरेजेज काॅरपोरेशन लिमिटेड को प्राप्त है। वित्तीय वर्ष 2013-14 से यह सम्पूर्ण राज्य में क्रियाशील है एवं सफलतापूर्वक मदिरा की थोक आपूत्र्ति का कार्य खुदरा उत्पाद अनुज्ञाधारियों को कर रहा है। सम्प्रति सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में लगभग सभी जिलों में झारखण्ड राज्य बिवरेजेज काॅरपोरेशन लिमिटेड का मद्य भण्डागार (डिपो) कार्यरत् हैं। सुचारू रूप से कार्य निष्पादन के उद्देश्य से झारखण्ड राज्य बिवरेजेज काॅरपोरेशन लिमिटेड के द्वारा बेवसाईट(http://jsbcl.in/) विकसित किया गया है तथा आॅडर्र फाॅर सप्लाई प्राप्त करने एवं एतद् संबंधी पारक निर्गत करने की प्रक्रिया पूर्णतः कम्प्यूटरीकृत है। ई.आई.बी. एवं निगरानी कोषांग का गठन अवैध मदिरा के चैर्य व्यापार पर नियंत्रण के उद्देश्य से उत्पाद मुख्यालय में एक ई.आई.बी. का गठन किया गया है। विभाग की मद्य निषेध नीति भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के अनुसरण में राज्य में मद्य निषेध नीति लागू करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाये गये हैं:-
(1) राज्य सरकार द्वारा मद्य निषेध नीति के अन्तर्गत मदिरा के प्रत्येक बोतल लाल अक्षरों में ‘‘मदिरापान स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है’’ अंकित करना अनिवार्य है।
(2) 21 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को मदिरा की बिक्री प्रतिबंधित है।
(3) प्रतिवर्ष 26 जून को ‘‘मद्यपान के विरूद्ध जागरूकता लाने के लिये अन्य राज्यों यथा बिहार की भाँति ‘‘मद्य निषेध दिवस’’ मनाये जाने की कार्य योजना है।
(4) झारखण्ड राज्य के अनुसूचित क्षेत्र के वैसे ग्राम पंचायतों जहाँ अनुसूचित जनजातियों की संख्या 50 प्रतिशत या उससे अधिक है वहाँ मदिरा की दुकानें खोलने पर प्रतिबंध है। राज्य मे